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प्राकृत व्याकरण: तृतीय पाद (Prakrit Vyakaran: Tritiya Paad)

New arrival
Binding
ISBN: 9789377702731 , 9377702739
Regular price ₹ 450.00

इस ग्रंथ में प्राकृत व्याकरण के तृतीय पाद का विश्लेषण है। सूत्र उसकी वृत्ति और शब्द-साधनिका के साथ शोधपूर्ण टिप्पणियां तथा सन्दर्भ का स्पष्ट उल्लेख होने से ग्रंथ पूर्णतः शोधपूर्ण हो गया है। इसकी खास बात यह भी है कि प्राकृत शब्दों की सिद्धि में अनेक सूत्र संस्कृत व्याकरण (सिद्धहेमचंद्र शब्दानुशासन) से भी प्रयुक्त हुए हैं। यहाँ उन सूत्रों का उल्लेख वृत्ति सहित करके ग्रंथ की उपयोगिता को बढ़ाया गया है। इस से पाठक गण व्यापक रूप से पाठ को समझ सकेंगे। प्राकृत व्याकरण वस्तुतः 'सिद्धहेमचंद्र शब्दानुशासन' के अष्टम् अध्याय का ही नाम है। अतः स्वाभाविक है कि प्रारम्भिक सात अध्याय, जिनमें संस्कृत व्याकरण के नियम उल्लिखित हैं, की नींव पर यह व्याकरण-भवन स्थापित है। अतः इसके सम्यक् बोध हेतु प्रारम्भिक सात अध्यायों का ज्ञान भी आवश्यक हो जाता है। पूर्ण अध्यायों का न सही, कम से कम उन सूत्रों का ज्ञान तो अवश्य होना चाहिए जो शब्द-सिद्धि में प्रयुक्त हुए हों। इस जरूरत को प्रस्तुत ग्रंथ स्पष्टतः पूर्ण करता है। शब्दों में होने वाले प्रत्येक परिवर्तन को सूत्र सहित स्पष्ट करके वृत्ति में भी जहाँ संशोधन की जरूरत महसूस हुई वहाँ अपनी बात स्पष्टतः रखी गई है। अतः यह ग्रंथ मात्र व्याख्या नहीं अपितु शोधपूर्ण व्याख्या-ग्रंथ है। साधिकार यह कहा जा सकता है कि प्राकृत भाषा, व्याकरण और साहित्य के जिज्ञासुओं के लिए यह सर्वाधिक सरल, सटीक उपयोगी और संग्रहणीय ग्रंथ होगा।

इसके सम्पादक आचार्य डॉ० पद्मराज स्वामी जी म. 'सादा जीवन उच्च विचार' के आदर्श को जीवन्त करने वाले सरलता के साथ विद्वत्ता का समायोजन करते हुए विषय को प्रस्तुत करने वाले विरले सन्त हैं। आपकी वक्तृत्व कला और लेखन-शैली में प्रांजलता, सरलता, गाम्भीर्यादि का संगम स्पष्ट देखा जा सकता है। इस तथ्य का दर्शन आपकी पूर्व प्रकाशित पुस्तकों 'अंतकृद्दशांग सूत्र का भाषा-वैज्ञानिक विश्लेषण, प्राकृत व्याकरण, गंतव्य की ओर, सुंदरकाण्ड' आदि में बखूबी किया जा सकता है। आप सतत सृजनशील साहित्यकार होने के साथ-साथ ज्योतिषाचार्य भी हैं। जन्म कुण्डली लेखन, वाचन, विश्लेषण करने के पाथ प्रत्येक समस्या का ज्योतिषीय सरल समाधान देना आदि आपके रुचिकर कार्य हैं। आपने अपने आश्रम का नाम ही 'ज्यातिष गुरुकुल' रखा है। प्राकृत भाषा के साथ ज्योतिष विद्या का भी प्रशिक्षण आप द्वारा प्रदान किया जाता है।