Kautilya Arthashastra: Saral Aur Saragarbhit Hindi Bhashanuvad (कौटिल्य अर्थशास्त्र: सरल और सारगर्भित हिन्दी भाषानुवाद)
Kautilya Arthashastra: Saral Aur Saragarbhit Hindi Bhashanuvad (कौटिल्य अर्थशास्त्र: सरल और सारगर्भित हिन्दी भाषानुवाद) - Paperback is backordered and will ship as soon as it is back in stock.
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आचार्य चाणक्य (कौटिल्य) द्वारा रचित 'अर्थशास्त्र' प्राचीन भारत का एक ऐसा महान और कालजयी ग्रंथ है, जिसकी प्रासंगिकता सहस्राब्दियों बाद आज भी अक्षुण्ण है। यह ग्रंथ शासन-व्यवस्था, राजनीति, अर्थनीति, कूटनीति और सैन्य रणनीति पर विस्तृत और व्यवस्थित दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। तत्कालीन मौर्य शासन के संदर्भ में रचित यह कृति आज भी नेतृत्व, प्रशासन और रणनीतिक सोच के क्षेत्र में प्रासंगिक मानी जाती है।
मुख्य स्तंभ और विशेषताएं:
शासन कला और प्रशासनिक ढांचाः कौटिल्य ने राज्य संचालन के लिए एक सुव्यवस्थित ढांचे का वर्णन किया है। इसमें राजा के कर्तव्यों, मंत्रियों के चयन और एक न्यायपूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था पर बल दिया गया है।
आर्थिक प्रबंधन और कराधानः ग्रंथ में व्यापार, कर-प्रणाली और राजस्व संग्रहण के ऐसे प्रभावी उपाय सुझाए गए हैं, जो आधुनिक अर्थव्यवस्था के लिए भी मार्गदर्शक हैं। यह धन सृजन के साथ-साथ लोक कल्याण पर आधारित आर्थिक नीतियों की व्याख्या करता है।
कूटनीति और सैन्य रणनीतिः अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए 'मंडल सिद्धांत' और युद्ध की रणनीतियों के माध्यम से यह पुस्तक कूटनीति की सूक्ष्म समझ प्रदान करती है।
नैतिक और आध्यात्मिक आधारः हिंदू आध्यात्मिक ज्ञान को नीतियों से जोड़ते हुए यह ग्रंथ सुनिश्चित करता है कि शासन में शक्ति के साथ-साथ नैतिकता और न्याय का संतुलन बना रहे।
'अर्थशास्त्र' की शिक्षाएं समय की सीमाओं से परे हैं। आज के नेतृत्वकर्ताओं, प्रशासकों और रणनीतिकारों के लिए यह पुस्तक व्यावहारिक मार्गदर्शन का एक अमूल्य स्रोत है।
संक्षेप में, यह ग्रंथ न केवल शासकों के लिए एक मार्गदर्शिका है, बल्कि एक आम नागरिक के लिए भी व्यावहारिक और रणनीतिक सोच विकसित करने हेतु एक अनिवार्य पाठ है।
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