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Shrimad Lokbhagavat Purana: Lok Bhagavat (श्रीमद् लोकभागवत पुराण: लोक भागवत)

New arrival
Binding
ISBN: 9789377703776 , 9377703778
Regular price ₹ 995.00
Categories: MLBD New Releases
Tags: Purana

भारतीय भक्ति-साहित्य की अनुपम धारा में श्रीमद् लोकभागवत पुराण एक दिव्य दीपशिखा के समान आलोकित होता है। यह ग्रंथ, संस्कृत में रचित श्रीमद्भागवत पुराण के गूढ़ एवं गाम्भीर्यपूर्ण तत्त्वों को जन-जन तक सरल रूप में पहुँचाने वाला एक पावन सेतु है, जिसे लोकभाषाओं-विशेषतः भोजपुरी और अवधी - के मधुर, सरस एवं भावपूर्ण प्रवाह में अभिव्यक्त किया गया है। इसके यशस्वी रचनाकार डॉ. नरेन्द्र त्रिपाठी हैं, जिनका यह अभिनव प्रयास धार्मिक ज्ञान को जनसुलभ बनाने की दिशा में एक श्रेष्ठ साधना है।

इस ग्रंथ में मूल भागवत के द्वादश स्कंधों का वर्णन दोहा-चौपाई, आल्हा तथा विविध संस्कृत के छंदों ("इन्द्रवज्रा", "उपजाति", "दोधक", "मणिमाला", "वंशस्थ", "स्रग्विणी", "शिखरिणी", "द्रुतविलम्बित" आदि) की सुमधुर शैली में किया गया है। प्रसाद-गुण से युक्त यह काव्य न केवल श्रवण में मधुर है, बल्कि सहज ही हृदय में उतरकर आत्मा को स्पर्श करता है। इसकी प्रत्येक पंक्ति भक्ति-रस की सरिता बनकर साधक के अंतर्मन को पवित्र एवं प्रेरित करती है।

श्रीमद् लोकभागवत पुराण वस्तुतः वेदान्त का सार है, जिसमें जीव और ब्रह्म की अभिन्नता का सरल एवं तात्त्विक विवेचन किया गया है। इसमें भगवान नारायण के निर्गुण एवं सगुण-दोनों स्वरूपों का अत्यंत भावपूर्ण निरूपण है। जहाँ उनका निर्गुण स्वरूप अनंत, निराकार और अव्यक्त है, वहीं भक्त की पुकार पर वे सगुण रूप धारण कर लीला-विलास करते हैं-यही इस ग्रंथ का आध्यात्मिक सौंदर्य है।

यह ग्रंथ केवल धार्मिक पाठ नहीं, बल्कि आत्मोन्नति और चित्त शुद्धि की साधना है। यह समाज में एकता, समरसता और सद्भावना को सुदृढ़ करता है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण की अलौकिक लीलाएँ, भक्तों की प्रेरणादायक कथाएँ तथा धर्म, कर्म और मोक्ष के सिद्धांत सरल एवं हृदयग्राही भाषा में प्रस्तुत किए गए हैं।

भोजपुरी और अवधी जैसी लोकभाषाओं का प्रयोग इस कृति को जनमानस के और अधिक निकट एवं आत्मीय बनाता है। निःसंदेह, श्रीमद् लोक-भागवत पुराण भारतीय संस्कृति और भक्ति-परंपरा की अमूल्य धरोहर है-एक ऐसा अमृतस्रोत, जो युगों तक मानवता को आध्यात्मिक आलोक प्रदान करता रहेगा।