MOTILAL BANARSIDASS PUBLISHING HOUSE (MLBD) SINCE 1903

Hyauba Bhavishyawani (ह्याउबा भविष्यबाणी)

New arrival
Binding
ISBN: 9789371006200 , 937100620X
Regular price ₹ 495.00
Categories: MLBD New Releases
Tags: Astrology

यह पुस्तक लेखक के अपहरण तथा ""ह्याउबा ग्रह"" की अद्भुत यात्रा का वर्णन करती है। इसमें उनके परग्रही मार्गदर्शक द्वारा प्रकट किए गए रहस्यों का विस्तार से वर्णन किया गया है। पुस्तक पृथ्वी के प्राचीन इतिहास और उसके रहस्यों पर प्रकाश डालती है। इसमें प्राथीन "मू, मिस्र और एटलांटिस" जैसी सभ्यताओं की कथाओं का विश्लेषण किया गया है, साथ ही मूसा और यीशु के संदेशों की वास्तविक उत्पत्ति का भी अन्वेषण किया गया है। इसके अतिरिक्त, यह पुनर्जन्म, एस्ट्रल यात्रा (Astral Travel), और टेलीपैथी जैसे रहस्यमय विषयों की गहन चर्चा करती है।

यह पुस्तक एक गहन आध्यात्मिक संदेश भी प्रदान करती है तथा बताती है कि उच्चतर चेतना का विकास किस प्रकार किया जा सकता है, क्योंकि मानवता को संभावित वैश्विक आपदा से बचाने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है।

सन् "1972" में ऑस्ट्रेलिया में बसने के बाद, फ्रांस में जन्मे "मिशैल देस्मारके (Michel Desmarquet)" का एक रात एक परग्रही प्राणी "थाओ" से संपर्क हुआ। थाओ उन्हें एक अंतरिक्ष यान द्वारा दूर स्थित ""ह्याउबा ग्रह"" पर ले गया। अपने मार्गदर्शक के रूप में थाओ ने उन्हें हमारे ग्रह के संभावित भविष्य के बारे में बताया तथा ऐसे गूढ़ सत्य उजागर किए, जो आज भी मानव जाति के लिए चुनौती बने हुए हैं।

देस्मारके महान पिरामिडों के वास्तविक उद्देश्य, बाइबिल के रहस्योद्घाटन के स्रोत तथा मंगल ग्रह पर जीवन के इतिहास का वर्णन करते हैं। वे यह भी बताते हैं कि ईस्टर द्वीप की विशाल मूर्तियों का निर्माण किसने किया, एटलांटिस और मू जैसे खोए हुए महाद्वीपों के पीछे का वास्तविक सत्य क्या है, तथा बरमूडा ट्रायंगल में होने वाली रहस्यमय घटनाओं के कारण क्या हैं।

पुस्तक में टेलीपैथी, आभामंडल (ऑरा) का महत्व, गुरुत्वाकर्षण से ऊपर उठना (लेविटेशन), अंतरिक्ष यात्रा तथा ब्रह्मांड की आंतरिक कार्यप्रणाली जैसे अनेक रहस्यमय मानसिक और आध्यात्मिक विषयों का भी विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है।

अंततः, थाओ द्वारा देस्मारके के साथ साझा किया गया संदेश पूर्णतः आध्यात्मिक है। उसके अनुसार, केवल चेतना के उच्च स्तर तक विकसित होकर ही मानवता संभावित वैश्विक आपदा से बच सकती है एक ऐसी दुखद नियति, जिसका सामना अतीत में अनेक अन्य उन्नत आकाशगंगीय सभ्यताएँ भी कर चुकी हैं।